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بِسْمِ اللهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيْم
اَلْحَمْدُ لِلّهِ رَبِّ الْعَالَمِيْن،وَالصَّلاۃ وَالسَّلامُ عَلَی النَّبِیِّ الْکَرِيم وَعَلیٰ آله وَاَصْحَابه اَجْمَعِيْن۔

बेनमाज़ी और नमाज़ में सुस्ती करने वाले का शरई हुकुम

तमाम उलमा का इस बात पर इत्तिफाक़ है कि फ़र्ज़ नमाज़ जानबूझ कर छोड़ना बहुत बड़ा गुनाह है। शरीअते इस्लामिया में ज़िना करने, चोरी करने और शराब पीने से भी बड़ा गुनाह नमाज़ का छोड़ना है। नमाज़ बिल्कुल न पढ़ने वालों या सिर्फ जुमा और ईदैन या कभी कभी पढ़ने वालों का क़ुरान व हदीस की रौशनी में शरई हुकुम किया है। इस सिलसिला में फजीलतुश्शैख मोहम्मद बिन सालेह ने अपनी किताब (रिसालतुन फी हुकमे तारिकिस्सलात) में उलमा की मुख्तलिफ रायें लिखी हैं जो नीचे दिए गए हैं।

1) हज़रत इमाम अहमद बिन हमबल फरमाते हैं कि ऐसा शख्स काफिर है और मिल्लते इस्लामिया से निकल जाता है। उसकी सज़ा यह है कि अगर तौबा करके नमाज़ की पाबन्दी न करे तो उसको क़त्ल कर दिया जाए।
2) हज़रत इमाम मालिक और हज़रत इमाम शाफई कहते हैं कि नमाज़ों को छोड़ने वाला काफिर तो नहीं अलबत्ता उसको क़त्ल किया जाएगा।
3) हज़रत इमाम अबू हनीफा फरमाते हैं कि उसको क़त्ल नहीं किया जाएगा अलबत्ता हाकिमे वक़्त उसको जेल में डाल देगा और वह जेल ही में रहेगा यहां तक कि तौबा करके नमाज़ शुरू कर दे या फिर वहीं मर जाए।
नमाज़ को छोड़ने या उसमें सुस्ती करने पर क़ुरान करीम और अहादीस में सख्त वईदें आई हैं जिनमें से बाज़ को ज़िक्र किया जा रहा है।

आयाते क़ुरानिया
““फिर उनके बाद ऐसे नासमझ पैदा हुए कि उन्होंने नमाज़ को बरबाद कर दी और नफसानी ख्वाहिशों के पीछे पड़ गए वह जहन्नम में डाले जाएंगे”” (सूरह मरयम 59)
“तुम्हें दोज़ख में किस चीज़ ने डाला? वह जवाब देंगे कि हम नमाज़ी न थे, न मिसकिनों को खाना खिलाते थे” (सूरह मुदस्सिर 42-44)
अहले जन्नत, जन्नत के बाला खानों में बैठे जहन्नमियों से सवाल करेंगे कि किस वजह से तुम्हें जहन्नम में डाला गया? तो वह जवाब देंगे कि हम दुनिया में न नमाज़ पढ़ते थे और भूकों को खाना खिलाते थे। गौर फरमाएं कि जहन्नमी लोग जहन्नम में डाले जाने की सबसे पहली वजह नमाज़ न पढ़ना बतलाया क्योंकि नमाज़ ईमान के बाद इस्लाम का अहम और बुनियादी रुक्न है जो हर मुसलमान के ज़िम्मे है।
“इन नमाजियों के लिए खराबी (और वैल नामी जहन्नम की जगह) है जो नमाज़ से गाफिल हैं”” (सूरह माऊन 4-5) इस से वह लोग मुराद हैं जो नमाज़ या तो पढ़ते ही नहीं या पहले पढ़ते रहे हैं फिर सुस्त हो गए या जब जी चाहता पढ़ लेते या ताखीर से पढ़ने को मामूल बना लेते हैं यह सारे मफहूम इसमें आ जाते हैं इस लिए नमाज़ की मज़कूरा सारी कोताहियों से बचना चाहिए।
“वह (मुनाफिक़) काहिली से ही नमाज़ को आते हैं और बुरे दिल से खर्च करते हैं”” (सूरह तौबा 54) मालूम हुआ कि नमाज़ को काहिली या सुस्ती से अदा करना मुनफिक की अलामतों में एक अलामत है।

अहादीस शरीफ
1) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया हमारे (अहले ईमान) और उनके (अहले कुफ़्र) दरमियान फ़र्क़ करने वाली चीज़ नमाज़ है, लिहाज़ा जिसने नमाज़ छोड़ दी उसके कुफ़्र किया। (मुसनद अहमद, नसई, अबू दाऊद, तिर्मीज़ी, इब्ने माजा)
2) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया नमाज़ को छोड़ना मुसलमान को कुफ़्र व शिर्क तक पहुचाने वाला है। (सही मुस्लिम)
3) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जान बूझ कर नमाज़ न छोड़ो जो जान बूझ कर नमाज़ छोड़ दे वह मज़हब से निकल जाता है। (तबरानी)
4) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया इस्लाम में उस शख्स का कोई हिस्सा नहीं जो नमाज़ नहीं पढ़ता। (बज़्ज़ार)
5) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स क़ुरान पाक याद करके भुला देता है और जो फ़र्ज़ नमाज़ छोड़ कर सोता रहता है उसका सर (क़यामत के दिन) पत्थर से कुचला जाएगा। (बुखारी)
6) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया मैं चाहता हूं कि किसी को नमाज़ पढ़ाने का हुकुम दूं फिर जुमा न पढ़ने वालों को उनके घरों समेत जला डालूं। (मुस्लिम)
7) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जिस शख्स ने तीन जुमा गफलत की वजह से छोड़ दिए अल्लाह तआला उसके दिल पर मुहर लगा देते हैं। (नसई, तिर्मीज़ी)
8) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स नमाज़ का एहतेमाम करता है तो नमाज़ उसके लिए क़यामत के दिन नूर होगी, उस (के पूरे ईमानदार होने) की दलील होगी और क़यामत के दिन अज़ाब से बचने का ज़रिया होगी। और जो शख्स नमाज़ का एहतेमाम नहीं करता उसके लिए क़यामत के दिन न नूर होगा, न (उसके पूरे ईमानदार होने की) दलील होगी, न अज़ाब से बचने का कोई ज़रिया होगा। और वह क़यामत के दिन फिरऔन, क़ारून, हामान और अबोय बिन खलफ के साथ होगा। (सही इब्ने हिब्बान)
नमाज़ पढि़ए इससे पहले कि आपकी नमाज़ पढ़ी जाए। अल्लाह तआला हस सबको नमाज़ का एहतेमाम करने वाला बनाए आमीन।

मुहम्मद नजीब क़ासमी (www.najeebqasmi.com)