بِسْمِ اللهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيْم
اَلْحَمْدُ لِلّهِ رَبِّ الْعَالَمِيْن،وَالصَّلاۃ وَالسَّلامُ عَلَی النَّبِیِّ الْکَرِيم وَعَلیٰ آله وَاَصْحَابه اَجْمَعِيْن۔

नमाज़े हाजत

नमाज़ अल्लाह तआला से तअल्लुक क़ायम करने और अपनी ज़रूरतों और हाजतों को मांगने का सबसे बड़ा ज़रिया है। अल्लाह तआला अपने पाक कलाम में इरशाद फरमाता है।

“ऐ ईमान वालो! सब्र और नमाज़ के ज़रिये मदद चाहो” (सूरह बक़रा 153) ‘‘सब्र और नमाज़ के ज़रिये मदद तलब करो” (सूरह बक़रा 45) ‘‘अल्लाह तआला ने फरमाया मैं तुम्हारे साथ हूं अगर तुम नमाज़ क़ायम रखो” (सूरह माईदा 12)

लिाहज़ा जब भी कोई परेशानी या मुसीबत सामने आए तो हमें चाहिए कि सब्र करें और नमाज़ का खास एहतेमाम करके अल्लाह तआला से तअल्लुक क़ायम करें। हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी हर पेरशानी के वक़्त नमाज़ की तरफ मुतवज्जह होते जैसा कि हदीस शरीफ में है। हज़रत हुज़ैफा (रज़ियल्लाहु अन्हु) फरमाते हैं कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को जब भी कोई अहम मामला पेश आता आप फौरन नमाज़ का एहतेमाम फरमाते। (अबू दाऊद, मुसनद अहमद)

नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पांच फ़र्ज़ नमाज़ों के अलावा नमाज़े तहज्जुद, नमाज़े इशराक, नमाज़े चाशत, तहैयतुल वज़ू और तहैयतुल मस्जिद का खास एहतेमाम फरमाते और फिर खास खास मौक़े पर अपने रब के हुज़ूर तौबा व इस्तिगफार के लिए नमाज़ ही को ज़रिया बनाते। सूरज या चान्द गरहन होता तो मस्जिद तशरीफ ले जाते। ज़लज़ला, आंधी या तूफान यहां तक कि तेज़ हवा भी चलती तो मस्जिद तशरीफ ले जाकर नमाज़ में मशगूल हो जाते। फाक़ा की नौबत आती या कोई दूसरी परेशानी या तकलीफ पहुंचती तो मस्जिद तशरीफ ले जाते। सफर से वापसी होती तो पहले मस्जिद तशरीफ ले जा कर नमाज़ अदा करते। इसलिए हमें भी चाहिए कि नमाज़ों का खास एहतेमाम करें और अगर कोई परेशानी या मुसीबत आए तो नमाज़ अदा करके अल्लाह तआला से मदद मांगें।

अल्लाह तआला से अपनी दुनियावी और उखरवी ज़रूरत को मांगने से सबसे बेहतर तरीका यह है कि दो रिकात नमाज़ इतिमनान व सुकून और ख़ुशू व ख़ुज़ू से पढ़ कर खूब आजज़ी और इंकिसारी के साथ अल्लाह से दुआएं करें। हज़रत अब्दुल्लाह बिन अबी औफ़ा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म ने इरशाद फरमाया जिस शख्स को अल्लाह तआला से या किसी आदमी से कोई हाजत हो तो वह अच्छी तरह वज़ू करे फिर दो रिकात नमाज़ अदा करे फिर अल्लाह तआला की हम्द व सना बयान करे, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दरूद भेजे और यह दुआ पढ़े: अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह बहुत बुरदबार और निहायत करम करने वाला है (हर एैब से) पाक और अरशे अज़ीम का मालिक है, तमाम तारिफें अल्लाह ही के लिए हैं जो तमाम जहानों को पैदा करने वाला है। (या अल्लाह!) मैं तुझसे तेरी रहमत के असबाब और तेरी बखशिश के वसाइल नीज़ हर नेकी से हिस्सा पाने और हर गुनाह से महफूज़ रहने का सवाल करता हूँ। या अरहमरराहिमीन! मेरे तमाम गुनाह माफ फरमा दीजिए मेरी सारी परेशानियां दूर कर दीजिए और मेरी तमाम ज़रूरतें जो तेरी पसन्दीदा हों पूरी फरमा दीजिए” (तिर्मीज़ी, इब्ने माजा) फिर जो ज़रूरत है उसको अल्लाह तआला से खूब मांगें।

हज़रत अबू दरदा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया जिसने अच्छी तरह वज़ू किया फिर ख़ुशू व ख़ुज़ू से दो रिकात नमाज़ पढ़ी अल्लाह तआला उसके सवाल को पूरा करेगा जल्द या देर से (जैसे चाहे)। (मुसनद अहमद)

मुहम्मद नजीब क़ासमी (www.najeebqasmi.com)